भारत की जनगणना 2021 (CENSUS OF INDIA 2021)


भारत की जनगणना 2021 के बारे में मुख्य तथ्य, पिछली जनगणना के मकाबले इस बार की जनगणना में क्या है खास




जनगणना 2021 की थीम - "जन भागीदारी से जनकल्याण"

     भारत जनसंख्या के मामले में फिलहाल दूसरे स्थान पर है। लेकिन आने वाले समय में उम्मीद लगाई जा रही है कि भारत चीन को पछाड़ कर पहले स्थान पर आ जाएगा। भारत उन लोकतांत्रिक देशों में से एक है, जहाँ विश्व की सबसे विशाल जनगणना की गौरवशाली प्रथा रही है। यह मात्र कुछ आंकड़े नहीं है, यह आंकड़े आने वाले समय में अनेक विकास नितियों, सरकार की योजनाओं और सरकार के कई कार्यों में इनका महत्वपूर्ण स्थान है। यदि सरकार को जनसंख्या के बारे में पूरी जानकारी हो तो वह अपनी योजनाओं की रूपरेखा उचित तौर पर तैयार कर सकती है।
  • वर्ष 2021 की जनगणना देश की 16 वीं जनगणना है और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद यह 8 वीं जनगणना है।
  • जनगणना 2021 की थीम - "जन भागीदारी से जनकल्याण"     
  • जनगणना 2021 की थीम अंग्रेजी (English) में - "People's Participation For People's Welfare"
  • देश की 16 वीं जनगणना (CENSUS 2021) की प्रक्रिया अप्रैल 2020 से शुरु हो जाएगी।
  • देश की 16 वीं जनगणना (CENSUS 2021) का कार्य दो चरणों में किया जाना है। 
  • प्रथम चरण - 1 अप्रैल 2020 से 30 सितम्बर 2020 तक (इस चरण में सभी व्यक्तियों के पास उपलब्ध जमीन और मकान का ब्यौरा दर्जा किया जाएगा) 
  • द्वितीय चरण - 9 फरवरी 2021 से 28 फरवरी 2021 तक(जनगणना का बाकी का सभी कार्य इस चरण में किया जाएगा) 
  • जनगणना 2021 के कार्य पर कुल खर्च 8754.23 करोड़ रुपये आएगा और एन0 पी0 आर0 (नेशनल रजिस्टर ऑफ पॉपुलेशन) को अपडेट करने में कुल 3941.35 करोड़ रुपये का खर्च आयेगा। 
  • जनगणना 2021 का कार्य भारत के प्रत्येक क्षेत्रों में सम्पन्न कराया जाएगा जबकि एन0 पी0 आर0 का कार्य असम राज्य को छोड़कर सभी राज्यों में किया जाएगा। (असम में एन0 पी0 आर0 का कार्य पहले ही सम्पन्न किया जा चुका है। )
  •  जनगणना एक्ट की धारा 8 की उपधारा (1) के तहत होने वाली जनगणना प्रक्रिया के प्रश्नों की सूची सभी विभागों को सौंप दी गयी है।
  • जनगणना 2021 (CENSUS 2021) में कुल 31 प्रश्नों की प्रश्नावली तैयार की गई है। 
  • इस प्रकार प्रश्नावली के 31 प्रश्नों के माध्यम से जनसंख्या के सामाजिक (उच्च/मध्यम/निम्न /बी0 पी0 एल0 वर्ग) की जानकारी एवं जातिगत स्तर पता लगाया जाएगा।
  • जनगणना 2021 में लिया गया मोबाइल नं0 मात्र जनगणना संबंधी संचार के उद्देश्य से ही लिया जाएगा, इसका प्रयोग किसी अन्य प्रयोजन हेतु नहीं किया जाएगा। 

   16 वीं जनगणना (वर्ष 2021) की जनगणना की विशेषताएँ-
  • 16 वीं जनगणना पूरी तरह से पेपरलैस, हाइटेक, (स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैब का प्रयोग ), स्पीडी, जीरो डुप्लीकेसी एवं मानवीय त्रुटिरहित होगी।
  • किसी क्षेत्र मे डिजिटली लिए गए आंकड़ों पर बटन प्रेस होते ही इन आंकड़ों की सूचना दिल्ली पहुँच जाएगी। 
  • आंकड़ों का संग्रहण और वर्गीकरण में पूरी तरह डिजिटलीकरण का प्रयोग किया जाएगा। 
  • आंकड़ो को मोबाइल एप्प के माध्यम से जनगणना कर्मियों द्वारा 16 भाषाओं में जानकारियों प्रेषित की जाएगी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इसका सत्यापन किया जाएगा।
  • 16 वी जनगणना में 30 लाख कर्मचारियों (सरकारी कर्मचारी, निगम कर्मचारी, शिक्षक एवं अन्य विभागों से) को लगाया जाएगा। (असम राज्य को छोड़कर)
  • जनगणना प्रगणकों (कर्मचारियों) के प्रशिक्षण हेतु राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर की प्रशिक्षण संस्थाओं की सहायता ली जाएगी। 
  • जनगणना प्रगणकों की मानदेय राशि का PFMS & DBT के माध्यम से सीधें बैंक खातों में हस्तांतरित किया जाएगा। यह राशि कुल जनगणना एवं NPR व्यय का 60 फीसद होगी। 
  • आम जनता को जनसांख्यिकी आंकड़ो को उपलब्ध कराने के लिए ऑनलाइन सुविधा दी जाएगी। 
  • डेटा संकलन में गुणवत्ता हेतु एक केन्द्रीय निगरानी एवं प्रबंधन पोर्टल की व्यवस्था की जाएगी।
  • एक कोड डायरेक्टरी की व्यवस्था की जाएगी जिसमें प्राप्त आंकड़ों को कूटबद्ध करके उनके प्रसंस्करण में समय की बचत की जा सकती है। 
  • जनगणना के आंकड़ो को अनुरोध करने पर विभिन्न मंत्रालयों, सभी राज्यों, सभी जिलों, सांसदो, विधायको, पार्षदों, डी0एम0/एस0 डी0 एम0 एवं ग्राम प्रधानों को प्रेषित किए जाएंगे जिससे शासन-प्रशासन अपने संबंधित क्षेत्रों में विकास नीति प्लान कर सकें। 
  • ब्लॉक स्तर के आंकड़ों को परिसीमन आयोग को उपलब्ध कराए जाएँगे जिनका उपयोग निर्वाचन में हो सकेगा। 
  • जनसंख्या आंकड़ें विभिन्न अनुसंधान संगठनों, हितधारकों को भी उपलब्ध कराए जाएगें। 
  • जनगणना निष्कर्ष को सरल भाषा में आम जनता के लिए भी उपलब्ध कराए जाएँगें। 
जनगणना का महत्व-
  • उच्च स्तर से लेकर ग्रास रूट लेवल तक विकास एवं कल्याणकारी नीतियों की रूपरेखा बनाने में सहायक।
  • लक्षित एवं कमजोर वर्गों से जुड़ी नीतियों को बनाने में। 
  • नीति क्रियान्वयन की सफलता-असफलता (फीडबैक में) के मूल्यांकन हेतु।
  • भारतीय जनसंख्या के सामाजिक-आर्थिक स्थिति का ज्ञान प्राप्त करने में सहायक। 
  • भ्रष्टाचार परअंकुश लगाने में सहायक।
  • सामाजिक, शैक्षणिक, वैज्ञानिक, ऐतिहासिक अनुसंधान कार्यों में आंकड़ों को उपलब्ध कराने में। 
  • प्रत्यक्ष एंव परोक्ष रोजगार सृजन में  (उदा0 के तौर पर जनगणना 2021 में पूरी जनगणना प्रक्रिया में दो करोड़ चालीस लाख मानव दिवस के रोजगार सृजन की संभावना है।)




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